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Thursday, April 6, 2017

06 अप्रेल 1980 भाजपा का स्थापना दिवस

06 अप्रेल 1980 को अस्तित्व में आई भारतीय जनता पार्टी आज विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल और दुनिया के सबसे बड़े लोकतन्त्र भारतीय गणतन्त्र की अगुवाई करने वाले सत्ताधारी दल के रूप में अपना स्थापना दिवस मना रही है। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के असंख्य कार्यकर्ताओं और राष्ट्रवाद पर विश्वास जताने वाले आम भारतीय नागरिकों को शुभकामनाएं  व् बधाई !
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जैसे अगणित कालजई नायकों को श्रद्धांजलि जिनके बलिदान ने आज भाजपा को विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बनने और अपने दम पर भारत की सत्ता के शीर्ष पर पहुँचने का रास्ता दिखाया !

एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान, नहीं चलेंगे !

कश्मीर हो या गोहाटी-अपना देश अपनी माटी !

जहां हुए बलिदान मुखर्जी- वो कश्मीर हमारा है !

धारा 370 धोखा है, देश बचा लो मौका है

यदि भारत में रहना होगा, वन्देमातरम कहना होगा !

हिन्दी, हिन्दू, हिंदुस्तान, मांग रहा है कमल निशान !

राम लला हम आएंगे, मन्दिर यहीं बनाएंगे !

भारत माँ की तीन धरोहर, अटल-आडवाणी- मुरली मनोहर !

अब की बारी अटल बिहारी !

अब की बार मोदी सरकार और  नमो नमो !

ये वो कालजयी उद्घोष थे जिसने भारतीय राजनीति को बदल कर रख दिया, योजनाबद्ध शब्द विन्यास का ये अनूठा प्रयोग ही तो था जिसने देश के आम आदमी के गहरे अन्दर तक राष्ट्रवाद जैसे जटिल विषय को आसानी से पहुंचाकर भारतीय जनता पार्टी को सबसे लोकप्रिय राजनीतिक दल बना दिया ! पण्डित दींन दयाल उपाध्याय, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का देश के लिए बलिदान आज भी भाजपा के कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा देता है तो अटल-आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी की तिकड़ी आज भी कार्यकर्ताओं के लिए पार्टी का मौलिक परिचय का महत्वपूर्ण अध्याय है ! पहले भाजपाई प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी के करिश्माई नेतृत्व ने आज की भारतीय जनता पार्टी के लिए मजबूत आधार तय किया जिसे 2014 के आम चुनावों में  नरेन्द्र मोदी जैसे सबसे लोकप्रिय हो चुके राजनीतिक शख्सियत के साथ भुनाने में पार्टी कार्यकर्ताओं ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी ! भारतीय जनता पार्टी की सबसे अनमोल निधि उसके कार्यकर्ता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक का अभिभावकत्व है जिसने उसे विचारधारा से दूर जाने के बजाय राष्ट्रवाद के प्रति और मुखर बनाया बावजूद इसके जनसंघ के दौर में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीन दयाल उपाध्याय, आपातकाल के बाद से  2010 तक  श्री अटल बिहारी वाजपेयी - लालकृष्ण आडवाणी - डॉ मुरली मनोहर जोशी और  मौजूदा दौर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व् भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की सफल जुगलबन्दी भी नए दौर की भाजपा की सफलता के लिए जिम्मेदार है ! 2017 में उत्तर प्रदेश सहित 4 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनना खासकर उत्तर प्रदेश की कमान योगी आदित्यनाथ को सौंपा जाना भी भविष्य की राजनीति की ओर स्पष्ट इशारा है जिसे समझने में भाजपा कार्यकर्ताओं को बहुत कठिनाई नहीं हो रही है हालंकि सबकुछ मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के  5 वर्षों के कार्यकाल पर निर्भर करेगा !

1951 को श्रद्धेय श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जी द्वारा आरएसएस के राजनीतिक घटक के रूप में भारतीय जनसंघ की स्थापना की गई । इस कालखण्ड में विभिन्न राजनीतिक उपलब्धियों और अनेक श्रंखलाबद्ध घटनाक्रमों के पश्चात आपातकाल की वजह से भारतीय जनसंघ पहले जनता पार्टी और फिर अनेक नए बदलावों के साथ 1980 में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की बुनियादी विचारधारा के साथ नए राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी का जन्म हुआ । 1951 में भारतीय जनसंघ से प्रारम्भ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और एकात्म मानववाद के विचारों के साथ शुरू हुआ राजनीतिक आन्दोलन आज सफलता के कई सोपान पूरे कर भारत के जन मन् में छा चुका है, भाजपा की इस सफलता के पीछे श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जैसे कई मनीषियों सहित असंख्य कार्यकर्ताओं का बलिदान और परिश्रम है।भाजपा या फिर यूँ कहिये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजनीतिक घटकों के लिए कश्मीर व् धारा 370 , रामजन्म भूमि, इस्लामिक आतंकवाद, और मुस्लिम तुष्टीकरण जैसे जन भावनाओं से जुड़े मुद्दे वरदान साबित हुए ! 

Tuesday, June 28, 2016

नशे से पस्त उत्तराखण्ड

आखिर जिस बात का डर था वही हुआ, एक पूरी पीड़ी बरबादी के मुहाने पर खड़ी खुद को बचाने की गुहार लगा रही है !
कोटद्वार में सैकड़ों नहीं अब ऐसे परिवारों की संख्या हज़ारों में है जो स्मैक या ड्रग्स की लत से जूझ रहे अपने बच्चों को तिल तिल मरता देखने को मजबूर हैं लेकिन कोई उपाय नजर नहीं आ रहा है।
1-2 वर्ष पहले किशोरियों और लड़कियों में इसका प्रभाव बेहद कम था लेकिन अचानक से नशे की गिरफ्त में फंसी किशोरियों और छात्राओं की संख्या में बेतहाशा वृद्धि ने विषय को चिंताजनक से कहीं ज्यादा भयावह बना दिया है ।
जो कल तक दोस्तों के साथ शौक में नशा कर रहे थे अब नशे के आदी हो गए हैं, माध्यम वर्गीय परिवारों से हैं तो नशे के लिए जरूरी पैसे जुटाने के लिए पहले तो अपने ही घरों में चोरी की और जब उससे भी गुजारा नहीं हुआ तो खुद ड्रग पैडलर बन अन्जाने में ही नशे के अंतर्राज्यीय सिंडीकेट का हिस्सा बन गए ।
उत्तराखण्ड पुलिस ड्रग डीलर पर करवाई करने और सप्लाई चेन तोड़ने, नशे की गिरफ्त में आकण्ठ डूबे युवा वर्ग की मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग के बजाय सिर्फ उन्हीं को गिरफ्तार कर रही है जो खुद ड्रग्स माफिया के षड्यंत्र का न सिर्फ शिकार हैं बल्कि इन्हें तो सोची समझी रणनीति के तहत इस  काले कारोबार का हिस्सा बनाया गया है।
कोटद्वार-भाबर ही नहीं उत्तराखण्ड की तराई के बड़े शहर, कस्बे और ग्रामीण इलाकों के साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों के अधिकांश ग्रामीण शहरों में स्मैक, हीरोइन, चरस और गांजे ने युवा और किशोर वर्ग में अन्दर तक पैठ बना ली है ! कोटद्वार-भाबर क्षेत्र का कोई भी विद्यालय और उसके छात्र-छात्राएं स्मैक से अन्जान नहीं रहे, हो सकता है किसी संस्थान में प्रभाव कम, ज्यादा या फिर शुरुआती दौर में हो लेकिन संक्रमण सब जगह फ़ैल चूका है ।
इन 3-4 वर्षों में स्मैक जैसे ड्रग्स और नशीली दवाओं का काला व्यापार किशोर छात्र-छात्राओं के बीच खूब फला फूला है, या यूँ कहें कि कोटद्वार ड्रग माफिया का अड्डा बन गया है या बनवा दिया गया है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी ।
कोटद्वार तो महज एक उदाहरण है उत्तराखण्ड में पैर पसार चुके स्मैक, हीरोइन और ड्रग्स के दुष्प्रभाव का, देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, ऋषिकेश, रामनगर, काशीपुर, रुद्रपुर, हल्द्वानी सहित तराई के विभिन्न कस्बों के साथ ही नैनीताल, श्रीनगर, टेहरी, गोपेश्वर, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पौड़ी जैसे पहाड़ी उपनगर भी इस संक्रमण से अछूते नहीं रह गए ।
कमोबेश कुछ वर्षों पहले तक मैं भी उत्तराखण्ड को बेहद शांत इलाका मानता था लेकिन अब पहाड़ी प्रदेश उत्तराखण्ड के बर्फ से धवल और सर्द वातावरण में नशे और अपराध का सामाजिक प्रदूषण काफी गहरी पैठ बना चूका है । ये भी सच है कि ड्रग एडिक्शन को लेकर उत्तराखण्ड के हालात पंजाब से बुरे नहीं हैं लेकिन मौजूदा हालात में पंजाब से कम भी नजर नहीं आते ।  प्रदेश सरकार भी अपरोक्ष रूप से शायद उत्तराखण्ड को इसी दिशा में बड़ते देखना चाहती है यही वजह है कि राज्य स्तर पर भयावह रूप ले चुकी ड्रग्स और नशे की समस्या का कोई रोड मैप बनता नजर नहीं आ रहा शायद एक उड़ता पंजाब जैसे प्रयोग की सख्त जरूरत है या फिर तमाशाई बन पंजाब जैसे बदतर हालातों तक सब्र करना होगा कि कोई आएगा फ़िल्म बनाएगा और फिर वही ढाक के तीन पात ! राज्य सरकार को चाहिए कि वो ड्रग्स माफिया के खिलाफ निर्णायक करवाई के लिए गृह मंत्रालय और नारकोटिक्स कन्ट्रोल ब्यूरो को अनुरोध पत्र भेज बड़े स्तर पर साझा करवाई की मांग करे साथ ही नशे से पीड़ित युवाओं के लिए जिला स्तर पर मनोवैज्ञानिक परामर्श व् उपचार केंद्र स्थापित करे।

Sunday, May 13, 2012

Mothers Day : ममता का कर्ज चुकाने का प्रयास


जिसके लिए पूरा जन्म कम उसके लिए सिर्फ एक ही दिन क्यों..?

आज पूरे विश्व में लोग मातृ दिवस  (MOTHERS DAY)  को धूम-धाम से मनाकर माँ के ममतामयी त्याग और समर्पण  का स्मरण कर अपनी कृतज्ञता ज्ञापित कर रहे हैं ! अचानक  से ख़ास बन गये साल के इस दिन पर  मुझे भी फोन और सोशियल साइट्स  पर कई मैसेज आये जिसमे माँ की महिमा को उद्धृत कर मदर्स डे की शुभकामनाएं प्रेषित की गयी थी !  इन संदेशों को पड़कर मुझे अच्छा  लगा, अच्छा इसलिए कि आजकल के भौतिकवादी समय में भी लोग माँ और उसके शिशु के बीच के पवित्र ममतामयी संबंधों की समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन फिर आश्चर्य भी हुआ कि जिस देश में माँ को देवतुल्य माना जाता है क्यों इस तरह का त्यौहार मनाकर उसकी महिमा के प्रति विशुद्ध व्यावसायिक  जन-जागरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है ..! दरअसल विदेशों में  इस तरह के असामाजिक त्यौहार का प्रचलन संबंधों की व्यावसायिक मार्केटिंग और भौतिकवादी युग में अपने कर्तव्यों को वार्षिक कलेंडर में बाँधने के लिए शुरू हुआ हैं ! आस्ट्रेलिया , यूरोप  और अमेरिकी देशों में हुआ जहाँ अधिकांश माता-पिता को उनके बच्चे घर से बाहर सामूहिक वृद्धाश्रमो में रखते हैं और वर्ष में एक बार मदर्स और फादर्स डे के अवसर पर नके लिए उपहार लेकर उनकी कुशल क्षेम पूछने जाते हैं, इन विशेष अवसरों के आलावा शायद ही मदर्स और फादर्स डे को मनाने वाले ये लोग कभी वृद्ध माता पिता की सुध नहीं लेते..!  माँ का स्मरण कर उसके योगदान को प्रचारित करने वाला इस प्रकार के त्यौहार " मदर्स डे"  के प्रति लोगों का बढता उत्साह पिछले कुछ वर्षों से ही नजर आ रहा है लेकिन अब माँ की ममता के प्रति अचानक जागरूक हुए लोगों का उत्साह इस त्यौहार को देश में भी परंपरा की शक्ल देता नजर आ रहा है !  वैसे तो इस त्यौहार में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है लेकिन समझ में नहीं आता कि सृष्टी की जननी माँ के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए साल में सिर्फ एक ही दिन को क्यों  चुना गया है, क्या साल में एक दिन माँ के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने मात्र से माँ के त्याग और समर्पण का उधार पूरा कर लेंगे...! असल में हम कर्तव्य के बोझ तले दब कर अपराधबोध से पीड़ित होकर ऐसा कर रहे हैं, जिन्हें सच में माँ के प्रति कृतज्ञता को प्रकट करना है और उसे सही में सम्मान देना है तो इसके लिए भावनाओं को कर्म तथा सेवा में परिवर्तित करने की आवश्यकता है ना कि एक दिन हो-हल्ला मचाकर कर्तव्य की इतिश्री करने की !   माँ के त्याग और समर्पण की अगर बात की जाय तो उसके लिए एक दिन नहीं  पूरा जन्म कम पड़ जायेगा ! दरअसल भारत और भारतीय लोगों को आज़ादी के छः दशक बीत जाने के बाद भी अंग्रेजों की वैचारिक गुलामी से  मुक्ती नहीं मिल पाई है, यही वजह है कि वे भारतीय परिवेश के बजाय पाश्चात्य परिवेश भौतिकवादी परम्पराओं से प्रभावित नजर आते हैं ! माँ कहने को तो जन्म देने वली स्त्री और जन्म लेने वाले शिशु के बीच का प्राकृतिक सम्बन्ध है लेकिन भारतीय दर्शन में माँ को सृष्टी की जननी मानते हुए ईश्वर का दर्जा दिया गया है, जिसके त्याग और समर्पण की किसी से कोई तुलना नहीं के जा सकती !  दुर्भाग्य से विदेशों में बूड़े माता-पिता को वृद्धाश्रमो में छोड़ने की भौतिकवादी प्रवृत्ती के चलते जन्मे "मदर्स और फादर्स डे " अब भारत की और भी रास्ता बनाने लगे हैं और इसके लिए प्रमुख भूमिका निभाने का काम कर रही हैं ग्रीटिंग कार्ड और गिफ्ट बनाने वाली बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ !  भारत विविध रंग-बिरंगी, लघु संस्कृतियों और उदार मन के लोगों का देश है जिससे  यहाँ के लोग बिना ज्यादा सोच विचार के नुकसान पहुँचाने वाले अतिक्रमणकारी परम्पराओं और रीति-रिवाजों को भी अपना लेते हैं ! 
सबकी माँ सदा स्वस्थ और खुश रहे,
 इन्ही शुभकामनाओं के साथ, 
अगली चर्चा तक  विदा 

Tuesday, April 5, 2011

भारत की अनमोल धरोहर" कण्वाश्रम"


ये बात शायद कम ही  लोग जानते हैं की महाराजा दुष्यंत और शकुंतला के  पुत्र चक्रवर्ती सम्राट भारत के नाम से ही  अपने देश का नाम भारत हुआऔर इस चक्रवर्ती सम्राट का जन्म  हिमालय की सुरम्य घाटियों और भाबर के संगम में मालिनी नदी के तट पर  कण्वाश्रम में हुआ था !   इतिहास के स्वर्णिम काल  में  कण्वाश्रम  शिक्षा, और संस्कृति का गौरवशाली केंद्र था जहाँ  के गुरुकुल में  देश विदेश के हजारों छात्र  अध्ययन करने आते थे..
अगर कहें की तब के दौर में भारत को विश्वगुरु बनाने में कण्वाश्रम से निकले विचारों और विद्यार्थियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका थी तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी ! लकिन ये अत्यंत दुःख का विषय है जिस स्थान ने अतीत में भारत को सांस्कृतिक और शेक्षणिक  मार्गदर्शन दिया वर्त्तमान में  वह अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है ! उत्तराखंड के पौढ़ी जनपद के कोटद्वार नगर के पास स्थित कण्वाश्रम अपने पुन:जागरण के बाट जोह रहा है ! 

Saturday, August 28, 2010

wellcome to be a part of conservation of our glorius culture and historical value

Hi friends...!
I am tryng to make a social effort to keep alive the glorius sighn of national proud. And fortunately i am writing about the place  "KANVASHRAM "which is the birth place of a miraculious child ,who had ruled our nation very successfully as chakrawarti samrat BHARAT and due to his popularity our nation known as BHARAT.  kanvashram is not well known place for every cityzen of india because they dont know that what was the glorius history and culturel value of our nation..! why our country mostly known as BHARAT before 1947..?
Chakrawarti Samrat BHARAT  was child of Hastinapur's King Dushyant and Shakuntala and fortunately he born at kanvashram , kanvashram is located 14 KM far from city KOTDWAR in Uttarakhands disttrict pauri .Although kanvashram is most important historical and cultural place of the world but at present mostly people of our nation dont know where is it ?